Saturday, August 22, 2009

लालितासहस्त्र नाम की महिमा

इस स्तोत्र के पाठ से सभी रोगों से छुटकारा मिल जाता है। और सभी प्रकार की समृधि मिलती है। इससे ज्वर आदि की पीड़ा दूर होती है तथा दीर्घ जीवन की प्राप्ति होती है। संतान हीन को संतान प्राप्त होती है। और चारों प्रकार के पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।
जो पुरूष गंगा आदि तीर्थ स्थानों में करोडो जन्मो में स्नान करता है अथवा काशी में करोड़ शिव लिंगो की प्रतिष्ठा करता है जो भक्त वेदों के ज्ञाता ब्राह्मणों को कुरुक्षेत्र तीर्थ में जाकर अनेक बार भार परिमित सुवर्ण का दान देता है। जो गंगातट पर करोड़ों अश्वामेघों को करता है और निर्जल मरुभूमि में करोड़ों कुँए निर्मित करता है जो अकाल पड़ने पर प्रतिदिन करोड़ ब्राह्मणों को भोजन कराता है। वह हज़ार वर्षों तक उससे करोड़ों गुना पुण्य इस लालितासहस्त्रनाम का एक बार पाठ करने से प्राप्त करता है।

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