ॐ ह्रीं श्रीं अ-सि-आ- उ -सा सर्व विघ्न रोगोप्द्रव विनाशाय
मम गृह शांति कुरु कुरु स्वाहा.
Thursday, November 25, 2010
Thursday, September 9, 2010
असाध्य रोग दूर करने का मंत्र
ॐ ह्रीं ह्रीं क्लीं क्लीं काली कंकाली.
महाकाली खप्पर वाली अमुकस्य अमुक व्याधि नाशय नाशय शम नय स्वाहा.
११००० बार जप करके सिद्ध करले. फिर रोगी का ३ दिन तक १०८ बार जल से झाडा करें तो अवश्य लाभ होगा.
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असाध्य रोग दूर करने का मंत्र
सर्व कार्य सिद्धि मंत्र
ॐ अ सि आ उ सा नमः , ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं नमः स्वाहा.
प्रतिदिन जपने से सब कार्य सिद्ध होतें हैं.
प्रतिदिन जपने से सब कार्य सिद्ध होतें हैं.
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सर्व कार्य सिद्धि मंत्र
Monday, September 6, 2010
समस्या से मुक्ति
पीपल के नीचे जाकर ११ बार "श्री राम जय राम जय जय राम" जाप करने से आप हर प्रकार की समस्या से मुक्ति पा सकते हैं. गुरुवार और शनिवार को यह अवश्य करें.
Tuesday, June 15, 2010
दुर्गाजी का सिद्ध मंत्र
ॐ ह्रीं दुं दुर्गाये नमः।
इस मंत्र के जपने से वाक सिद्धि, पुत्र प्राप्ति, शत्रुओं पर विजय, रोग मुक्ति, सुख आदि संभव है।
इस मंत्र के जपने से वाक सिद्धि, पुत्र प्राप्ति, शत्रुओं पर विजय, रोग मुक्ति, सुख आदि संभव है।
Monday, June 14, 2010
भैरव सर्व फलप्रद स्तोत्र
ॐ भं भैरवाय अनिष्ट निवारणाय स्वाहा।
मम सर्वे ग्रहा : अनिष्ट निवारणाय स्वाहा।
ज्ञानं देहि , धनं देहि, मम दारिद्र्य दुखं निवारणाय स्वाहा।
सुतं देहि , यशं देहि, मम गृह क्लेशं निवारणाय स्वाहा।
स्वास्थ्य देहि , बलं देहि, मम शत्रु निवारणाय स्वाहा।
सिद्धं देहि, जयं देहि, मम सर्वे ऋण : निवारणाय स्वाहा ।
ॐ भं भैरवाय अनिष्ट निवारणाय स्वाहा।
मम सर्वे ग्रहा : अनिष्ट निवारणाय स्वाहा।
ज्ञानं देहि , धनं देहि, मम दारिद्र्य दुखं निवारणाय स्वाहा।
सुतं देहि , यशं देहि, मम गृह क्लेशं निवारणाय स्वाहा।
स्वास्थ्य देहि , बलं देहि, मम शत्रु निवारणाय स्वाहा।
सिद्धं देहि, जयं देहि, मम सर्वे ऋण : निवारणाय स्वाहा ।
ॐ भं भैरवाय अनिष्ट निवारणाय स्वाहा।
Monday, May 31, 2010
नरसिंह मंत्र
ॐ नृम नृम नृम नर सिंहाय नमः ।
प्रतिदिन इस मंत्र के १००० जप करने से धन धान्य की वृद्धि होती है।
प्रतिदिन इस मंत्र के १००० जप करने से धन धान्य की वृद्धि होती है।
Tuesday, May 11, 2010
श्रीकृष्ण का अद्भुत मंत्र
ॐ श्रीं नमो भगवते रास मंडलेश्वराय श्रीकृष्णाय स्वाहा।
इस रास मंडित मंत्र का १०८ बार पाठ प्रतिदिन की पूजा में करना अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होता है।
इस रास मंडित मंत्र का १०८ बार पाठ प्रतिदिन की पूजा में करना अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होता है।
सूर्य भगवान के २१ नाम
भगवान सूर्य ने साम्ब से कहा - मैं अपने अतिशय गोपनीय, पवित्र इक्कीस शुभ नामों को बताता हूँ। इनके पाठ करने से सहस्त्र नाम के पाठ का फल प्राप्त होगा। मेरे इक्कीस नाम इस प्रकार है -
१) विकर्तन ( विप्पतिओं को काटने तथा नष्ट करने वाले), २) विवस्वान (प्रकाश रूप), ३) मार्तंड (जिन्होंने अंड में बहुत दिनों निवास किया), ४) भास्कर , ५) रवि, ६) लोकप्रकाशक , ७) श्रीमान, ८) लोक चक्षु , ९) गृहेश्वर , १०) लोक साक्षी , ११) त्रिलोकेश , १२) कर्ता, १३) हर्ता , १४) तमिस्त्रहा (अन्धकार को नष्ट करने वाले) , १५) तपन , १६) तापन, १७) शुचि ( पवित्रतम) ,
१८) सप्ताश्ववाहन , १९) गभस्तिहस्त ( किरणे ही जिनके हाथ स्वरुप हैं ), २०) ब्रह्मा,
२१) सर्वदेवनमस्कृत।
भगवान सूर्य ने कहा - हे साम्ब ! ये इक्कीस नाम मुझे अति प्रिय है। यह स्तवराज के नाम से प्रसिद्द है। यह स्तवराज शरीर को निरोग बनानेवाला, धन की वृद्धि करने वाला, और यशस्कर है। जो कोई इन नामो से उदय और अस्त दोनों संध्याओं के समय मेरी स्तुति करता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
१) विकर्तन ( विप्पतिओं को काटने तथा नष्ट करने वाले), २) विवस्वान (प्रकाश रूप), ३) मार्तंड (जिन्होंने अंड में बहुत दिनों निवास किया), ४) भास्कर , ५) रवि, ६) लोकप्रकाशक , ७) श्रीमान, ८) लोक चक्षु , ९) गृहेश्वर , १०) लोक साक्षी , ११) त्रिलोकेश , १२) कर्ता, १३) हर्ता , १४) तमिस्त्रहा (अन्धकार को नष्ट करने वाले) , १५) तपन , १६) तापन, १७) शुचि ( पवित्रतम) ,
१८) सप्ताश्ववाहन , १९) गभस्तिहस्त ( किरणे ही जिनके हाथ स्वरुप हैं ), २०) ब्रह्मा,
२१) सर्वदेवनमस्कृत।
भगवान सूर्य ने कहा - हे साम्ब ! ये इक्कीस नाम मुझे अति प्रिय है। यह स्तवराज के नाम से प्रसिद्द है। यह स्तवराज शरीर को निरोग बनानेवाला, धन की वृद्धि करने वाला, और यशस्कर है। जो कोई इन नामो से उदय और अस्त दोनों संध्याओं के समय मेरी स्तुति करता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
Monday, May 3, 2010
ऋण मुक्ति मंत्र
ॐ श्री गणेश ऋण छिन्धि वरेण्य हुं नमः फट । इस ऋण हर्ता गणेश मंत्र को एक वर्ष तक लगातार प्रति सप्ताह ११०० बार जप करना चाहिए। इससे गणेश जी प्रसन्न होते है और साधक का ऋण चुकता होता है। कहा जाता है कि जिसके घर में एक बार भी इस मंत्र का उच्चारण हो जाता है उसके घर में कभी भी ऋण या दरिद्रता नहीं आ सकती।
Sunday, April 25, 2010
बाधा मुक्ति दायक मंत्र
ॐ नमो हरि मर्कटाय स्वाहा।
इस मंत्र का नियमित जाप करने से सब प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। साधक मंत्र पढ़कर रोगी के सिर पर हाथ रखे तो रोगी को राहत मिले।
इस मंत्र का नियमित जाप करने से सब प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। साधक मंत्र पढ़कर रोगी के सिर पर हाथ रखे तो रोगी को राहत मिले।
Friday, January 1, 2010
Saturday, October 17, 2009
स्वयं सिद्ध मन्त्र
ॐ श्री राम दूताय नमः
यह हनुमान जी का पंचाक्षरी मन्त्र है जो की स्वयं सिद्ध है। श्री हनुमान जी के इस मन्त्र में स्थित ॐ के माध्यम से पर ब्रह्मा परमात्मा की कृपा, श्री के माध्यम से श्री लक्ष्मी अर्थात माता जानकी जी की कृपा, राम के माध्यम से श्री हनुमान जी के प्रिय श्री रामजी की कृपा प्राप्त होती है। जब भक्त इस मन्त्र का जप करते है तब श्री हनुमान जी इस मंत्र के माध्यम से हमारी पुकार सुनकर हमारे शरीर में सर्व शक्तियों के साथ विराजमान हो जाते है। श्री हनुमान जी श्री राम के परम भक्त एवं सेवक है इसलिए अपने नाम दूताय के पूर्व अपने प्रभु श्री राम का स्मरण सुन कर श्री हनुमान जी अत्यन्त प्रसन्न होते है और मन्त्र के माध्यम से हमारी पुकार सुन कर तुंरत इस बात का संदेश अपने प्रभु श्री राम को देते है। प्रभु श्री राम भी अपने परम भक्त श्री हनुमान के मुख से संदेश सुन कर अति प्रसन्न होते है और भक्त पर अपनी विशेष कृपा दृष्टि बरसाते है क्योंकि भगवान श्री राम की यह नीति है की उन्हें अपने सेवक के सेवक अति प्रिय होते है।
यह हनुमान जी का पंचाक्षरी मन्त्र है जो की स्वयं सिद्ध है। श्री हनुमान जी के इस मन्त्र में स्थित ॐ के माध्यम से पर ब्रह्मा परमात्मा की कृपा, श्री के माध्यम से श्री लक्ष्मी अर्थात माता जानकी जी की कृपा, राम के माध्यम से श्री हनुमान जी के प्रिय श्री रामजी की कृपा प्राप्त होती है। जब भक्त इस मन्त्र का जप करते है तब श्री हनुमान जी इस मंत्र के माध्यम से हमारी पुकार सुनकर हमारे शरीर में सर्व शक्तियों के साथ विराजमान हो जाते है। श्री हनुमान जी श्री राम के परम भक्त एवं सेवक है इसलिए अपने नाम दूताय के पूर्व अपने प्रभु श्री राम का स्मरण सुन कर श्री हनुमान जी अत्यन्त प्रसन्न होते है और मन्त्र के माध्यम से हमारी पुकार सुन कर तुंरत इस बात का संदेश अपने प्रभु श्री राम को देते है। प्रभु श्री राम भी अपने परम भक्त श्री हनुमान के मुख से संदेश सुन कर अति प्रसन्न होते है और भक्त पर अपनी विशेष कृपा दृष्टि बरसाते है क्योंकि भगवान श्री राम की यह नीति है की उन्हें अपने सेवक के सेवक अति प्रिय होते है।
माता तुलसी की प्रसन्नता हेतु
माता तुलसी की प्रसन्नता हेतु इस दशाक्षरी मन्त्र का जाप करना चाहिए
श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वृंदा वन्ये स्वाहा
श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वृंदा वन्ये स्वाहा
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माता तुलसी की प्रसन्नता हेतु
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