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Monday, September 14, 2009

लालितासहस्त्र नाम

जैसे सम्पूर्ण जन्म जन्मान्तरों के अन्तिम जन्म में व्यक्ति को श्रीविद्या के प्रति भक्ति पैदा होती है, वैसे ही इस सहस्त्र नाम का पाठ करने की भावना उसी व्यक्ति में आती है जिसका यह जन्म अन्तिम होता है, अर्थात जिसका अब और जन्म नही होना है।

Saturday, August 22, 2009

लालितासहत्रनाम पाठ

जो भक्त प्रतिदिन इस स्तोत्र का पाठ नही कर सकता है, उसे पुण्य दिनों में इसका पाठ अवश्य करना चाहिए। अपनी स्त्री के तथा पुत्र के जन्म नक्षत्रों, नवमी, शुक्लपक्ष की चतुर्दशी, शुक्रवार तथा विशेष करके पूर्णमासी के दिन इसका पाठ अवश्य करें। स्वयं के जन्मदिवस, पत्नी के जन्मदिवस तथा पुत्र के जन्म दिवस पर भी लालितासहस्त्र नाम का पाठ करें।

लालितासहस्त्र नाम की महिमा

इस स्तोत्र के पाठ से सभी रोगों से छुटकारा मिल जाता है। और सभी प्रकार की समृधि मिलती है। इससे ज्वर आदि की पीड़ा दूर होती है तथा दीर्घ जीवन की प्राप्ति होती है। संतान हीन को संतान प्राप्त होती है। और चारों प्रकार के पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।
जो पुरूष गंगा आदि तीर्थ स्थानों में करोडो जन्मो में स्नान करता है अथवा काशी में करोड़ शिव लिंगो की प्रतिष्ठा करता है जो भक्त वेदों के ज्ञाता ब्राह्मणों को कुरुक्षेत्र तीर्थ में जाकर अनेक बार भार परिमित सुवर्ण का दान देता है। जो गंगातट पर करोड़ों अश्वामेघों को करता है और निर्जल मरुभूमि में करोड़ों कुँए निर्मित करता है जो अकाल पड़ने पर प्रतिदिन करोड़ ब्राह्मणों को भोजन कराता है। वह हज़ार वर्षों तक उससे करोड़ों गुना पुण्य इस लालितासहस्त्रनाम का एक बार पाठ करने से प्राप्त करता है।